हम भारत की शान को भारत कि शान कहेंगे।
हम अपने भगवान को तो, भगवान कहेंगे।
अयोध्या ही नहीं पुरा देश स्वागत कर रहा है।
हम अपने प्रभु श्री राम को सादर जय श्री राम कहेंगे।
हम भारत की शान को भारत कि शान कहेंगे।
हम अपने भगवान को तो, भगवान कहेंगे।
अयोध्या ही नहीं पुरा देश स्वागत कर रहा है।
हम अपने प्रभु श्री राम को सादर जय श्री राम कहेंगे।
नमस्कार , एक नया मुक्तक हुआ है समात फर्माएं मैं इसे बीना किसी भूमिका के पेश कर रहा हूं मुझे यकीन है आपके दिल तक पहुंचेगा |
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तेरे पास नफरत है बददुआएं हैं मुझे देने के लिए
मेरे पास अनमोल वफाएं हैं तुझे देने के लिए
ये दुनिया मुझे बहुत गरीब समझती है लेकिन
मेरे मां के पास करोड़ों की दुआएं हैं मुझे देने के लिए
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मेरा ये मुक्तक आपको कैसा लगा मुझे अपने विचार कमेन्ट करके जरूर बताइएगा | मै जल्द ही फिर आपके समक्ष वापस आउंगा तब तक साहित्यमठ पढ़ते रहिए अपना और अपनों का बहुत ख्याल रखिए , नमस्कार |
नमस्कार 🙏आपको श्री राम नवमी पर्व की हार्दिक शुभकामनाएँ | विषय - नवरात्रि पर विधा - मुक्तक में दिनांक - 17/4/2021 दिन - शनिवार को साहित्य बोध के फेसबुक पटल पर मैने ये मुक्तक लिखा था जिसे पटल के द्वारा सम्मानित किया गया है | आप भी रचना पढ़े व बताएं की कैसी रही |
रचना -
अपनी शक्ति सब को फिर दिखाओ मां
अपने भक्तों को इस संकट से बचाओ मां
कोरोनारुपी असुर पाप लेकर आया है
इस असुर का भी सर्वनाश करने आओ मां
मेरा ये मुक्तक आपको कैसा लगा मुझे अपने विचार कमेन्ट करके जरूर बताइएगा | मै जल्द ही फिर आपके समक्ष वापस आउंगा तब तक साहित्यमठ पढ़ते रहिए अपना और अपनों का बहुत ख्याल रखिए , नमस्कार |
नमस्कार , काव्य कलश पत्रिका परिवार के साप्ताहिक प्रतियोगिता आयोजन शब्द सुगंध क्रमांक -40 में विषय-फिर वही बात में विधा-मुक्तक में दिनांक-19/02/2021 , दिन-शुक्रवार को मैने अपने लिखे दो मुक्तक प्रतियोगिता में सम्मिलित किए थे जिन्हें प्रतियोगिता के संपादकों के द्वारा सम्मानित किया गया है
रचना-
ये सभी नखरे आज कर रही है
चल ना इशारे ये रात कर रही है
मैं कह तो रहा हूँ हां मोहब्बत है
यार तू फिर वही बात कर रही है
वो थोडा़ बहुत घबराई है
फिर तब जरा सा शर्माई है
क्या अदाकारी है रुठने की
फिर वही बात नजरआई है
मेरे ये मुक्तक आपको कैसे लगे मुझे अपने विचार कमेन्ट करके जरूर बताइएगा | मै जल्द ही फिर आपके समक्ष वापस आउंगा तब तक साहित्यमठ पढ़ते रहिए अपना और अपनों का बहुत ख्याल रखिए , नमस्कार |
नमस्कार , पिछले एक महिने के दौरान मैने कुछ मुक्तक लिखें हैं जिन्हे मैं अपके समक्ष प्रस्तुत करने कि इजाजत चाहूँगा , मुक्तक देखें के
हर सबूत को हर सत्य को तोड़ मरोड़ करने पर आमादा हैं
वो पत्रकारिता के नाम पर कातिलों से गठजोड़ करने पर आमादा हैं
आतंकियों और कातिलों को मासूम बनाकर tv चैनलों पर दिखाने वाले
ये हमारी इंसाफ की लडा़ई को कमजोर करने पर आमादा हैं
बिना आग लगे कहीं से यू ही धूआं निकलता नही है
झुठ के तेल के बिना सच का चिराग जलता नही है
तुम सच कह रहे हो भारत तुम पर भारत यकीन करता है
किसी के काला कहने से सुरज का सच बदलता नही है
मोहब्बत का ठोंग रचा जाता है वफा का नाम लेकर
वो तुमसे झुठ बोलता है तुम्हारे खुदा का नाम लेकर
तुम भी तीसरी बार मोहब्बत करो दिल साफ करके
और इसकी शुरुआत करों पहली दो बेवफा का नाम लेकर
पाप को तेरी ललकार सुनी है आज पुरी दुनियां ने
सत्य की सच्ची पुकार सुनी है आज पुरी दुनियां ने
अत्याचारी दंभ भरेगा कब तक अपनी झुठी सत्ता का
हिन्द के शेरनी कि दहाड़ सुनी है आज पुरी दुनियां ने
'चौकिदार चोर है' के खुब नारे लगे थे
चुनाव जीतने इसी के सहारे लगे थे
कोई इन्हें न झुठा कहो न कहो फरेबी
पास होने के चक्कर में पप्पु हमारे लगे थे
हर पीडित बेटी के साथ इंसाफ होना चाहिए
योगी तेरे राज से ये आगाज होना चाहिए
बलात्कार आज समाज में फैली महामारी है
इस महामारी का जड़ से इलाज होना चाहिए
स्वार्थ के लिए इस धरा को नर्क मत करो
सियासत के लिए दिखावे का वर्क मत करो
एक जगह खुब होहल्ला दुसरी जगह सन्नाटा
नेताजी सुनोंं बेटी बेटी में तो फर्क मत करो
मेरे ये मुक्तक अगर अपको पसंद आए है तो आप मेरे ब्लॉग को फॉलो करें और अब आप अपनी राय बीना अपना जीमेल या जीप्लप अकाउंट उपयोग किए भी बेनामी के रूप में कमेंट्र कर सकते हैं | आप मेरे ब्लॉग को ईमेल के द्वारा भी फॉलो कर सकते हैं |
इन मुक्तकों को लिखते वक्त अगर शब्दो में या टाइपिंग में मुझसे कोई गलती हो गई हो तो उसके लिए मै बेहद माफी चाहूंगा | मै जल्दी ही एक नई रचना आपके सम्मुख प्रस्तुत करूंगा | तब तक अपना ख्याल रखें अपनों का ख्याल रखें , नमस्कार |
नमस्कार , उत्तर प्रदेश के हाथरस जिले से दिल दहला देने वाली #कथित सामुहिक बलात्कार की घटना देश में छायी हुई है , कुछ लोग इसे निर्थया 2 कह रहे है और कहा भी जाना चाहिए क्योंकि खबरों के मुताबिक उस बहन के साथ बर्बरता ही इतनी कि गई थी तभी तो वह पंन्द्रह दिन वह दर्द सहती रही और आखिर में दर्द नही सह पाई और इस दुनियां से चल बसी | खबर है कि चारों आरोपियों को पकड़ लिया गया है और कडी़ कार्यवाही करने का आश्वासन उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ जी के द्वारा दिया जा रहा है | आथी रात को परिवार की मर्जी के बीना बेटी की लाश जलाने को लेकर पुलिस कि भुमिका संदेह के घेरे में है | मेरी यही मांग और प्रार्थना माननीय मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ जी से है जिसे मैने इन चार लाइनों में लिखा है
हर पीडित बेटी के साथ इंसाफ होना चाहिए
योगी तेरे राज से ये आगाज होना चाहिए
बलात्कार आज समाज में फैली महामारी है
इस महामारी का जड़ से इलाज होना चाहिए
मगर इस बीच इसे लेकर जैसा हिंन्दुस्तान में आम तौर पर चुनाव के वक्त पर होता है सियासत भी खुब हो रही है | कुछ लोग इस सामाजिक अपराथ को दलित बनाम स्वर्ण बनाने पर लगे है , कुछ नेता मौकाफरस्ती कर रहे हैं , बलात्कार की खबरे अन्य राज्यों से भी आरही है पर सलेक्टिव होकर केवल उत्तर प्रदेश के हाथरस ही जा रहे है पीडित परिवार से मिलने मगर अन्य जगहों पर नही | ऐसे नेताओं के लिए भी मैने चार लाइनों में यू अपनी बात कहने कि कोशिश की है
स्वार्थ के लिए इस धरा को नर्क मत करो
सियासत के लिए दिखावे का वर्क मत करो
एक जगह खुब होहल्ला दुसरी जगह सन्नाटा
नेताजी सुनोंं बेटी बेटी में तो फर्क मत करो
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इन मुक्तकों को लिखते वक्त अगर शब्दो में या टाइपिंग में मुझसे कोई गलती हो गई हो तो उसके लिए मै बेहद माफी चाहूंगा | मै जल्दी ही एक नई रचना आपके सम्मुख प्रस्तुत करूंगा | तब तक अपना ख्याल रखें अपनों का ख्याल रखें , नमस्कार |
नमस्कार , पिछले कुछ वर्षो से हम देख रहें है कि कुछ टी वी चैनल आतंकवादीयों अलगाववादीयों और अपराधियों को पत्रकारिता के नाम पर अपना मंच प्रदान करते आए हैं और न शिर्फ मंच प्रदान करते हैं बल्कि बाकायदा उनका महिमामंडन भी करते है राष्ट की जन भावना के साथ खिलवाड़ करते आए हैं तथा अपराधियों के अपराथ को सामान्यीकृत करने का प्रयास करते आए हैं और इसका हालिया उदाहरण सुसांत सिंह राजपुत के केस में देखने को मिला जब एक तथाकथीत बडे़ चैनल ने इस केस कि मुख्य आरोपी को बैठाकर हास्यास्पद सवाल पुछे और मुख्य आरोपी को पुरा समय दिया जिससे वह पिडी़त पर ही संगीन आरोप लगा सके और उसका चरित्र हनन कर सके और न सिर्फ पिडी़त बल्की उसके पुरे परीवार पर आरोप लगा सके और उनका भी चरित्र हनन कर सके | यह बहुत दुर्भाग्यपुर्ण बात है |
इसलिए अब समय आ गया है कि इन टी बी चैनलों का पुर्णतय बहिस्कार करके इन्हे सत्य से और राष्ट की जन भावना से अवगत कराया जाए | इसी ख्याल पर मैने एक मुक्तक लिखा है
हर सबूत को हर सत्य को तोड़ मरोड़ करने पर आमादा हैं
वो पत्रकारिता के नाम पर कातिलों से गठजोड़ करने पर आमादा हैं
आतंकियों और कातिलों को मासूम बनाकर tv चैनलों पर दिखाने वाले
ये हमारी इंसाफ की लडा़ई को कमजोर करने पर आमादा हैं
जिस तरह से घने अंधेरे को रोशनी की एक किरण हरा देती है उस तरह से टीवी पत्रकारिता में भी कुछ चैनल ऐसे है जो रोशनी की वही किरण हैं और अगले मुक्तक में मैने एक चैनल का नाम भी लिखा है यदि आप समझ जाएं तो कमेंट में लिखिएगा
बिना आग लगे कहीं से यू ही धूआं निकलता नही है
झुठ के तेल के बिना सच का चिराग जलता नही है
तुम सच कह रहे हो 'भारत' तुम पर भारत यकीन करता है
किसी के काला कहने से सुरज का सच बदलता नही है
मेरे ये मुक्तक अगर अपको पसंद आए है तो आप मेरे ब्लॉग को फॉलो करें और अब आप अपनी राय बीना अपना जीमेल या जीप्लप अकाउंट उपयोग किए भी बेनामी के रूप में कमेंट्र कर सकते हैं | आप मेरे ब्लॉग को ईमेल के द्वारा भी फॉलो कर सकते हैं |
इन मुक्तकों लिखते वक्त अगर शब्दो में या टाइपिंग में मुझसे कोई गलती हो गई हो तो उसके लिए मै बेहद माफी चाहूंगा | मै जल्दी ही एक नई रचना आपके सम्मुख प्रस्तुत करूंगा | तब तक अपना ख्याल रखें अपनों का ख्याल रखें , नमस्कार |
नमस्कार , पिछले दो तीन हप्तों के दौरान मैने कुछ मुक्तक लिखें हैं जिन्हें मैं आपके सम्मुख रख रहा हुं
कोई तुझे अपना बच्चा कहता है
कोई तुझे बहोत सच्चा कहता है
जब तू था भरा बुरा कहते रहे लोग
अब हर कोई बडा़ अच्छा कहता है
सारे समझौतें को संबंधों को सीमाओं को जो तोडा़ तुमने
हमे निहत्था जान झुंड बना जो घात लगाकर घेरा तुमने
तबाही का बर्बादी का और मौत का तांडव देख लिया
जो हल्दी घाटी के वीरों को गलवान घाटी पर छेडा़ तुमने
इन आंखों में अश्क यूही नही आता
जिसका इंतजार है वोही नही आता
चांद की जगह सुरज नही ले सकता
यहां किसी कि तरह कोई नही आता
अब हो गया मेरे लिए सपना वो
मानता ही नही था मेरा कहना वो
तो क्या हुआ तमाम गिले सिकवे थे
मगर था तो मेरा अपना वो
शहीदों वाला इनका आगाज होना चाहिए
अंदाज इनका भगत आजाद होना चाहिए
भले गांधी रहें मन से सरदार रहें तन से
पर हर बच्चे के दिल में सुभाष होना चाहिए
अपने जमीन की हिफाजत भी नहीं की गई तुमसे
सच की ईमान की सियासत भी नहीं की गई तुमसे
दोस्त कहकर मौन रहकर बौने को राजा बना दिया
इसे निरंकुशता कहें या कायरता बगावत भी नहीं की गई तुमसे
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इन मुक्तकों लिते वक्त अगर शब्दो में या टाइपिंग में मुझसे कोई गलती हो गई हो तो उसके लिए मै बेहद माफी चाहूंगा | मै जल्दी ही एक नई रचना आपके सम्मुख प्रस्तुत करूंगा | तब तक अपना ख्याल रखें अपनों का ख्याल रखें , नमस्कार |
नमस्कार , मुंतजिर हुं कि सितारों की जरा सी आंख लगे , चांद को छतपे बुला लुंगा इशारा करके | राहत इंदौरी का sab tv पर वाह वाह क्या बात है के शो में सुना मेरा पहला यही वो शेर है जिसने मुझे उस दौर में राहत साहब का दिवाना बना दिया था और मेरी दिवानगी का आलम यह था कि जब मैं शो देखता था तो पेन और कॉपी लेकर बैठता था राहत साहब को तभी से मैं लगातार पढ़ता सुनता और देखता आ रहा हुं और यदि मैं सच कहुं तो आज जिस तरह भी टूटी फुटी गजल या शेर कह पाता हुं तो उसमें राहत साहब का बडा़ योगदान है क्योंकी उन्हीं की शायरी को सुन सुन कर मुझे शायरी से मोहब्बत हो गयी
राहत साहब के जाने का सबसे बडा़ नुकसान यह हुआ है कि अब आने वाली पीढि़यां हिंदी उर्दु शायरी के इस अजिम जादुगर शायर का लाइव नही सुन पाएंगी मगर मुझे यहा थोडा़ सुकून है कि कम से कम एक बार मैने राहत साहब को लाइव सुना है मैं चाहता था कि जीवन में कम से कम एक बार उनसे मिलुं और उन्हें अपनी गजलें और शेर सुनाउं और उनसे कुछ दाद लूं मगर अब मेरा ये ख्वाब महज एक ख्वाब बनकर रह गया है इसलिए मैने शेर में भी कहा है कि मेरा तो निजी नुकसान हुआ है |
दुनिया के लिए एक शख्स हलाकान हुआ है
मगर मेरा तो निजी नुकसान हुआ है
अब जब राहत साहब हमारे बिच नही रहे तो उनकी तमाम ग़जलें तमाम शेर हमें उनके हमारे बीच होने का आभास कराते रहेंगें मेरी प्रभु श्री राम से प्रर्थना हैं कि दिवंगत आत्मा को अपने चरणों में स्थान दें ओम शांति 🙏
राहत साहब की शायरी को लेकर लोगों का अक्सर मिला जुला रुप रहा | जब से मैने उन्हें पढ़ना सुनना शुरु किया था तब से मैने यह महसुस किया की उनकी शायरी को लेकर अक्सर ही कुछ लोग नाराज तो कुछ लोग ताराज रहें | उनके कुछ शेरों को लेकर उनसे असहमत था और हमेशा मुझे यह लगता रहा कि राहत साहब ने ये क्यों लिखा और यही तो एक अच्छे पाठक की निशानि है अगर वह रचनाकार की तारिफ कर सकता है तो आलोचना भी कर सकता है | इसी को मन में रखकर मैने एक मुक्तक यू कहा है
अब हो गया मेरे लिए सपना वो
मानता ही नही था मेरा कहना वो
तो क्या हुआ तमाम गिले सिकवे थे
मगर था तो मेरा अपना वो
इन विचारों को लिखते वक्त अगर शब्दो में या टाइपिंग में मुझसे कोई गलती हो गई हो तो उसके लिए मै बेहद माफी चाहूंगा | मै जल्दी ही एक नई रचना आपके सम्मुख प्रस्तुत करूंगा | तब तक अपना ख्याल रखें अपनों का ख्याल रखें , नमस्कार |
नमस्कार , पिछले बीते महीने भर में मैने कुछ मुक्तक लिखें हैं जिन्हे मै आप के दयार में हाजीर कर रहा हूं मुझे यकिन है आपको ये मुक्तक यकिनन पसंद आएंगे
अमृत पीने की तमन्ना कौन नही करता
मौत से ज्यादा जीने की तमन्ना कोन नही करता
मेरा उसका वस्ल बहोत मुस्कील है मगर
चांद को छुने की तमन्ना कौन नही करता
इश्वर अल्लाह भगवान गीता बाइबल कुरान मुझमें हैं
सारे हिन्दुस्तान में हुं मै और सारा हिन्दुस्तान मुझमें है
एक तरफ हैं फूलों के खेत खलिहान और पर्वत पहाडियां है
एक तरफ समंदर और सारा रेगिस्तान मुझमें है
जाने क्या इश्क के खेल में क्या अच्छा या बुरा है
आओ जाने तुम्हे मोहब्बत के बारे में कितना पता है
कैसी चलन है वो तुम्हे उसके बारे में क्या पता है
तम्हे उसके बारे में मुझसे ज्यादा पता है
खुशीयां मेरे हिस्से में कम और बहोत ज्यादा गम आते हैं
दिल तो बहोत रोता है मगर आंख में आशु जरा कम आते हैं
मेरी तरफ उंग्ली करके सारे रहनुमाओं ने ये कहा
पहले तुम आगे चलो फिर पिछे पिछे हम आते हैं
वही है हयात की कहानी मगर किरदार बदलते रहते हैं
दुनिया एक किराए का घर है और किराएदार बदलते रहते हैं
कभी मोहब्बत कभी गम कभी खुशी कभी तन्हाई
दिल बीमार भी वही है बस आजार बदलते रहते हैं
मन की सारी सेटिंग डिस्टर्ब हो गयी
जीवन के प्रोग्राम की इंटरप्ट हो गयी
वायरस कि तरह घुस गई हो दिल की हार्डडिस्क मे
मोहब्बत की सारी फाइले करप्ट हो गयी
जहर नहीं बेचता चटपटा चूरमा बेचता हूं मैं
बच्चों के लिए मीठी गोली और खुरमा बेचता हूं मैं
उस मोहल्ले की सारी लड़कियां मेरा इंतजार करती है
नाक की नथनी कान की बाली आंखों के लिए सूरमा बेचता हूं मैं
मेरे ये मुक्तक अगर अपको पसंद आई है तो आप मेरे ब्लॉग को फॉलो करें और अब आप अपनी राय बीना अपना जीमेल या जीप्लप अकाउंट उपयोग किए भी बेनामी के रूप में कमेंट्र कर सकते हैं | आप मेरे ब्लॉग को ईमेल के द्वारा भी फॉलो कर सकते हैं |
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नमस्कार , सितंबर महिने और अब तक में मैने ये कुछ नए मुक्तक लिखें हैं जो मेरी पिछली चली आ रही श्रंखला 'चार चार लाइनों में बातें करुंगा आपसे' का हिस्सा है | मैं ये चाहुंगा के आप इन मुक्तो को भी पढे जिस तरह से आपने मेरे सभी पुराने मुक्तकों को पढा है |
भले ही हर बदन पर खादी नही है
यहा हर कोई उदारवादी नही है
हर व्यक्ति हर वर्ग हर जाती एक समान है
चलो सुकून है आज का समाज मनुवादी नही है
रेगिस्तान के खेतों में चूडी खनकेगी
हर खलिहान के माथे पर बिंदी चमकेगी
ये बता दो पत्थर की इमारतों को
सब्ज जमीन पर जिंदगी पनपेगी
रेट के टीलों को सजल कहने वाले
खेत के खरपतवारों को फसल कहने वाले
मोहब्बत का एक मिसरा नही लगा पाए
चलो निकलो ,बड़े आए हैं गजल कहने वाले
उजागर है दुनिया में सच छिपा नही है
ये बता कि आज तुझसे कौन खफा नहीं है
ये जो खुद को मसीहा कहता है पड़ोसियों का
ये शख्स तो अपनों का सगा नही है
मोहब्बत अबकी बार है , नई बात है यार
पहला-पहला प्यार है , नई बात है यार
मैं तो हर रोज करता ही था मगर इस बाल
उसे मेरे ऑनलाइन आने का इंतजार है , नई बात है यार
हर मदहोश शख्स में बस शराबी देखते हैं
ये क्या लोग हैं के बस खराबी देखते हैं
उन यारों का याराना छुट गया यार वरना
मेरे यार तो हर मौसम में ख्वाब गुलाबी देखते हैं
मेरी ये मुक्तक अगर अपको पसंद आई है तो आप मेरे ब्लॉग को फॉलो करें और अब आप अपनी राय बीना अपना जीमेल या जीप्लप अकाउंट उपयोग किए भी बेनामी के रूप में कमेंट्र कर सकते हैं | आप मेरे ब्लॉग को ईमेल के द्वारा भी फॉलो कर सकते हैं |
इस मुक्तक को लिखते वक्त अगर शब्दो में या टाइपिंग में मुझसे कोई गलती हो गई हो तो उसके लिए मै बेहद माफी चाहूंगा | मै जल्दी ही एक नई रचना आपके सम्मुख प्रस्तुत करूंगा | तब तक अपना ख्याल रखें अपनों का ख्याल रखें , नमस्कार |