नमस्कार , कजरी या सावन महीने का लोकगीत एक तरह की लोकगीत है जोकि सावन के महीने में गायी जाती है | कजरी लोकगीत मुख्यतः मध्य प्रदेश , छत्तीसगढ़ , बिहार आदि राज्यों में गायी जाती है | सावन का महीना हरियाली से भरा होता है और यही इस लोकगीत की आत्मा होता है |
तकरीबन 2 हफ्ते पहले मैंने भी एक कजरी लोक गीत की रचना की है जिसे मैं आपके सम्मुख हाजिर कर रहा हूं आपके दुलार की उम्मीद है -
पटना के बिंदिया
बनारस के साड़ी
लेकर आब सईयां
पकड़के रेलगाड़ी
बनारस के साड़ी
लेकर आब सईयां
पकड़के रेलगाड़ी
सावन के महीना
कठिन होता जीना
चम चम चमके बिजली
पानी बरसे रोजीना
कईसे समझाई तोहरे की
पिया समझा लाचारी
हाली आब सईयां
पकड़के रेलगाड़ी
कठिन होता जीना
चम चम चमके बिजली
पानी बरसे रोजीना
कईसे समझाई तोहरे की
पिया समझा लाचारी
हाली आब सईयां
पकड़के रेलगाड़ी
बरसात की टिप - टिप
दीया जले धिप - धिप
जिया हमार धडके
धक - धक , धिक - धिक
आजाना जल्दी
तड़पे तोहार प्यारी
आबन सईयां
पकड़के रेलगाड़ी
दीया जले धिप - धिप
जिया हमार धडके
धक - धक , धिक - धिक
आजाना जल्दी
तड़पे तोहार प्यारी
आबन सईयां
पकड़के रेलगाड़ी
पटना के बिंदिया
बनारस के साड़ी
लेकर आब सईयां
पकड़के रेलगाड़ी
बनारस के साड़ी
लेकर आब सईयां
पकड़के रेलगाड़ी
मेरी ये कजरी या सावन महीने का लोकगीत आपको कैसी लगी मुझे अपने कमेंट्स के जरिए जरूर बताइएगा | अगर अपने विचार को बयां करते वक्त मुझसे शब्दों में कोई गलती हो गई हो तो उसके लिए मैं तहे दिल से माफी चाहूंगा | मैं जल्द ही वापस आऊंगा एक नए विचार नयी रचनाओं के साथ | तब तक अपना ख्याल रखें, अपनों का ख्याल रखें ,नमस्कार |
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