सोमवार, 6 जनवरी 2020

गजल . प्यार का रोग हो भी सकता है लगाया भी जा सकता है

      नमस्कार , हाल हि में मेरी लिखी एक नयी गजल यू है के

प्यार का रोग हो भी सकता है लगाया भी जा सकता है
जीने का ये तरिका आजमाया भी जा सकता है अपनाया भी जा सकता है

दिवानो को कहदो जरा होशियार रहे
उन्हे बहलाया फुसलाया भी जा सकता है उकसाया भी जा सकता है

मै मंदिर कि चौखट पर रखा हुआ दीया
मुझसे घर में रोशनी भी कि जा सकती है घर जलाया भी जा सकता है

हो ये भी सकता है कि मजनु जिम्मेदार ना हो लैला कि मौत का
गलतबयानी भी कि जा सकती है उसे फसाया भी जा सकता है

गुनाह करके सबुत मिटाने का कोई एक ही तरिका थोडी है
फरियादी को डराया धमकाया भी जा सकता है जिंदा जलाया भी जा सकता है

दिल कि बात दिल में रखकर कोई फायदा नही
तनहा दिल के कुछ एहसासों को बताया भी जा सकता है दिखाया भी जा सकता है

      मेरीे ये गजल अगर अपको पसंद आई है तो आप मेरे ब्लॉग को फॉलो करें और अब आप अपनी राय बीना अपना जीमेल या जीप्लप अकाउंट उपयोग किए भी बेनामी के रूप में कमेंट्र कर सकते हैं | आप मेरे ब्लॉग को ईमेल के द्वारा भी फॉलो कर सकते हैं |

      इस गजल को लिखते वक्त अगर शब्दो में या टाइपिंग में मुझसे कोई गलती हो गई हो तो उसके लिए मै बेहद माफी चाहूंगा | मै जल्दी ही एक नई रचना आपके सम्मुख प्रस्तुत करूंगा | तब तक अपना ख्याल रखें अपनों का ख्याल रखें , नमस्कार | 

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

Trending Posts