शनिवार, 13 अप्रैल 2019

गाना, मै सातों वचन मोहब्बत मांगती हूं

    नमस्कार, ये गाना मैने तकरीबन एक साल पहले लिखा था अभी तक इसे आपके सामने ये सोचकर नही रख रहा था के मुझे लगता है कि मेरा ये गाना थोडा सा अस्सी - नब्बे के दशक में आने वाले गानों के जैसा है तो मुझे लगता था के यहां तो सुनना भी नही है पढना है और इस तरह के गाने को एक ब्लॉग पर कौन पढ़ेगा | लेकिन कल जब मैने मेरे एक दोस्त को कवि प्रदीप का लिखा एक गाना कही से पढ़ते देखा तो मुझे भी लगा कि मुझे भी मेरा गाना आपके सामने रखना चाहिए सो आज यहा लिख दिया

मैं सातों वचन मोहब्बत मांगती हूं

न ऐसो आराम न रुतबा तुम्हारा
न धन न दौलत न गहने मांगती हूं
हर जन्म तुम रहना साथ मेरे पिया
मैं सातों वचन मोहब्बत मांगती हूं

सीताराम सी जोडी हो अपनी
खुशीयां रहें ज्यादा हमेशा
कमाई भले हो थोड़ी अपनी
मै भला कहा कोई ताजमहल चाहती हूं
हर जन्म तुम रहना साथ मेरे पिया
मैं सातों वचन मोहब्बत मांगती हूं

तुमको प्राणों से प्यारी रहूं
सातों जन्म तुम मेरे रहो
सातों जन्म मै तुम्हारी रहूं
तुमको ही बस मै वर चाहती हूं
हर जन्म तुम रहना साथ मेरे पिया
मैं सातों वचन मोहब्बत मांगती हूं

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      इस गाने को लिखते वक्त अगर शब्दो में या टाइपिंग में मुझसे कोई गलती हो गई हो तो उसके लिए मै बेहद माफी चाहूंगा | मै जल्दी ही एक नई रचना आपके सम्मुख प्रस्तुत करूंगा | तब तक अपना ख्याल रखें अपनों का ख्याल रखें , नमस्कार |

भजन, मेरी लेखनी में उतरआ मां मै तुझे बुलाता हूं

     नमस्कार , आज मै आप को मेरी कुछ दिन पहले लिखी मेरे जीवन की पहली सरस्वती वंदना सुना रहा हूं मुझे इस बार पुरा विश्वास हैं कि मेरी ये छोटी सी सरस्वती वंदना आपको पसंद आएगी

मेरी लेखनी में उतरआ मां मै तुझे बुलाता हूं

मेरे हर राग हर छंद का सार मुझे बनाता हूं
तेरे कमल चरणों में अपना सिर झुकाता हूं
हे मां वीणावादीनी तेरी अर्चना में अपने शब्द चढाता हूं
मेरी लेखनी में उतरआ मां मै तुझे बुलाता हूं

सारे अलंकार तेरे ही
सारे रस तुझसे ही
तेरे आने की आशा में
मैं अपना आंगन किताबों से सजाता हूं
मेरी लेखनी में उतरआ मां मै तुझे बुलाता हूं

सातों सुर तेरे उपासक
सारे राग तेरे सेवक
हे मां उसे संगीतमय करदे
जैसा भी हो मै जो कुछ भी गाता हूं
मेरी लेखनी में उतरआ मां मै तुझे बुलाता हूं

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बुधवार, 10 अप्रैल 2019

ग़ज़ल, तनहा ये तरिका बदलना पड़ेगा तुम्हें

    नमस्कार, आज ही लिखी मेरी इस गजल के कुछ शेर यू देखे कि

अब अथाह गहराई तक उतरना पड़ेगा तुम्हें
ओंठ से दिल तक का रास्ता बहोत लम्बा है बहोत दुर तक चलना पड़ेगा तुम्हें

हुस्न भी हुस्न के बगैर बेकाम है
इन खुबसुरत चेहरों के लिए कुछ शेर कहना पड़ेगा तुम्हें

मोहब्बत को मां के हाथ का बना हलवा मत समझलेना
एक ही ज़िन्दगी में कई बार जीना मरना पड़ेगा तुम्हें

अब भी अगर खामोश रहे तो सर काट डाला जाएगा
अपनी जान बचाने के लिए अब लड़ना पड़ेगा तुम्हें

इस कमरे के हर कोने को रोशनी की जरुरत है
जुगनूओं अब चिराग बनकर जलना पड़ेगा तुम्हें

ऐसे तो उन्हें मोहब्बत समझ में आने से रही
तनहा ये तरिका बदलना पड़ेगा तुम्हें

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शनिवार, 6 अप्रैल 2019

भोजपुरी लोकगीत, चोली में हमरा पैटर्न लाकबा

     नमस्कार , आज इंटरनेट की क्रांती ने आज हर भषा को लाभ पहुँचाया है यही वजह है की न शिर्फ राष्टीय भाषा बल्कि क्षेत्रीय भाषाओ की पहोच में बहोत इजाफा हुआ है | मैं यहा मेरी लिखी एक नयी भोजपुरी लोकगीत आपके सम्मुख प्रस्तुत कर रहा हूं

एकर वाईफाई कनेक्शन पियवा के पासबा
सून ए देवरु
चोली में हमरा पैटर्न लाकबा

जवानी के फयदा केहु अउर न उठाई
अनजान कनेक्शन जुडहु न पाई
हमार जोबना पोरटेक्टेड बा ए देवरजी
माजा जे चाही त भईया से अपना पासवर्ड लाई
हमार इहे निहोरा तोहरे से आजबा
सून ए देवरु
चोली में हमरा पैटर्न लाकबा

एनो ओने छुई ना रांग होजाई
गलत डलला से जवानी के सिस्टम हैंग होजाई
झिन करी बरियारी मान जाई बलिया
राउर भईया के नोटिफिकेशन सेंड हो जाई
जाई देंखे आई गउआं में आज मुन्नी के नाचबा
सून ए देवरु
चोली में हमरा पैटर्न लाकबा

एकर वाईफाई कनेक्शन पियवा के पासबा
सून ए देवरु
चोली में हमरा पैटर्न लाकबा

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