बुधवार, 4 नवंबर 2020

ग़ज़ल , हद पार प्यार कराता है

      नमस्कार , आपको करवाचौथ की हार्दीक शुभकामनाएं | इस पर्व के शुभ अवसर पर मैने एक ग़ज़ल लिखी है जिसे आपके समक्ष हाजिर कर रहा हूँ कैसी रही मुझे जरुर बताइएगा

सब्र भी यार कराता है

हद पार प्यार कराता है


ये चांद मी तेरे जैसा है

बहोत इंतजार कराता है


भुख मुझे भी लगती है

व्रत पुरा प्यार कराता है


ये मेरी चलनी का चांद

प्यार का इजहार कराता है


सारी उमर मैं सिर्फ तेरा हूँ

तनहा ये इकरार कराता है

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      इस ग़ज़ल को लिखते वक्त अगर शब्दो में या टाइपिंग में मुझसे कोई गलती हो गई हो तो उसके लिए मै बेहद माफी चाहूंगा | मै जल्दी ही एक नई रचना आपके सम्मुख प्रस्तुत करूंगा | तब तक अपना ख्याल रखें अपनों का ख्याल रखें , नमस्कार |

शुक्रवार, 30 अक्टूबर 2020

ग़ज़ल , जिंदगी कठिन है,यूं बातें करने से कुछ नहीं होगा

 जिंदगी कठिन है,यूं बातें करने से कुछ नहीं होगा

जी ले जीने के लिए,यूं मरने से कुछ नहीं होगा


जिंदगी दरिया है और हमें खुद ही तैरना होगा

बना ले खुद किनारा,यूं तड़पने से कुछ नहीं होगा


एक बात याद रख,तू आसमान का बादल है

खुशी की बरसात कर,यूं गरजने से कुछ नहीं होगा


संघर्ष है जिंदगी और हमारी कठिन कहानी है

लड़ जा जिंदगी से,सिर्फ समझने से कुछ नहीं होगा


उड़ता पंछी है तू और ये आसमान सब तेरा है

तेज़ हवाए देख कर,यूं गिरने से कुछ नहीं होगा


अभी तो तेरी शुरुआत है लम्बी तेरी जवानी है

जीना सिख अब,यू मौत पकड़ने से कुछ नहीं होगा

~नवोदयन 'कान्हा'

27 अक्तूबर 2020 को 6:19 pm

शनिवार, 3 अक्टूबर 2020

ग़ज़ल , फला कहता है विकास की बहार आई है

      नमस्कार , मैने आज एक नयी ग़ज़ल लिखी है जिसे मैं अपके सम्मुख प्रस्तुत कर रहा हूँ पढ़ कर जरुर बताए की कैसी रही 

फला कहता है विकास की बहार आई है

मेरी दुआ तो उसकी नजर उतार आई है


सुनते हैं उसने कोई नया कानुन बनाया है

किसानों में गुस्से की खबरें हजार आई है


योगीजी के राज में बलात्कार होगया भाई

सियासत करने वालों की भरमार आई है


लगता है देश में गृहयुद्ध करा देंगें न्युज चैनल

ब्रेकिंग न्युज एक के बाद एक लगातार आई है


फलाने का लड़का अब पड़ता है रात भर

उस गांव में ना बिजली पहली बार आई है


सुखीया दद्दा बता रहे थे दुक्खीलाल को

इलाज मुफ्त जब से फला की सरकार आई है


तनहा एक तो चुनाव दो हार उस पर महामारी

विरोधी नेताओं की नयी पीढी़ ही बेकार आई है

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मुक्तक , चार र चार लाइनों में बातें करुंगा आपसे 19

      नमस्कार , पिछले एक महिने के दौरान मैने कुछ मुक्तक लिखें हैं जिन्हे मैं अपके समक्ष प्रस्तुत करने कि इजाजत चाहूँगा , मुक्तक देखें के

हर सबूत को हर सत्य को तोड़ मरोड़ करने पर आमादा हैं 

वो पत्रकारिता के नाम पर कातिलों से गठजोड़ करने पर आमादा हैं

आतंकियों और कातिलों को मासूम बनाकर tv चैनलों पर दिखाने वाले

ये हमारी इंसाफ की लडा़ई को कमजोर करने पर आमादा हैं


बिना आग लगे कहीं से यू ही धूआं निकलता नही है

झुठ के तेल के बिना सच का चिराग जलता नही है

तुम सच कह रहे हो भारत तुम पर भारत यकीन करता है

किसी के काला कहने से सुरज का सच बदलता नही है


मोहब्बत का ठोंग रचा जाता है वफा का नाम लेकर

वो तुमसे झुठ बोलता है तुम्हारे खुदा का नाम लेकर

तुम भी तीसरी बार मोहब्बत करो दिल साफ करके

और इसकी शुरुआत करों पहली दो बेवफा का नाम लेकर


पाप को तेरी ललकार सुनी है आज पुरी दुनियां ने

सत्य की सच्ची पुकार सुनी है आज पुरी दुनियां ने

अत्याचारी दंभ भरेगा कब तक अपनी झुठी सत्ता का

हिन्द के शेरनी कि दहाड़ सुनी है आज पुरी दुनियां ने


'चौकिदार चोर है' के खुब नारे लगे थे

चुनाव जीतने इसी के सहारे लगे थे

कोई इन्हें न झुठा कहो न कहो फरेबी

पास होने के चक्कर में पप्पु हमारे लगे थे


हर पीडित बेटी के साथ इंसाफ होना चाहिए

योगी तेरे राज से ये आगाज होना चाहिए

बलात्कार आज समाज में फैली महामारी है

इस महामारी का जड़ से इलाज होना चाहिए


स्वार्थ के लिए इस धरा को नर्क मत करो

सियासत के लिए दिखावे का वर्क मत करो

एक जगह खुब होहल्ला दुसरी जगह सन्नाटा

नेताजी सुनोंं बेटी बेटी में तो फर्क मत करो

      मेरे ये मुक्तक अगर अपको पसंद आए है तो आप मेरे ब्लॉग को फॉलो करें और अब आप अपनी राय बीना अपना जीमेल या जीप्लप अकाउंट उपयोग किए भी बेनामी के रूप में कमेंट्र कर सकते हैं | आप मेरे ब्लॉग को ईमेल के द्वारा भी फॉलो कर सकते हैं |

      इन मुक्तकों को लिखते वक्त अगर शब्दो में या टाइपिंग में मुझसे कोई गलती हो गई हो तो उसके लिए मै बेहद माफी चाहूंगा | मै जल्दी ही एक नई रचना आपके सम्मुख प्रस्तुत करूंगा | तब तक अपना ख्याल रखें अपनों का ख्याल रखें , नमस्कार |


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