रविवार, 24 जनवरी 2021

कविता , तांडव शब्द को बदनाम मत करो

      नमस्कार , तांडव विवाद तो आपको पता ही होगा इसी को ध्यान में रखते हुए मैने एक कविता लिखी है जिसे मै आपके सम्मुख प्रस्तुत कर रहा हूँ कविता पर अपने विचार जरुर बताइएगा |

तांडव शब्द को बदनाम मत करो


तांडव शब्द को बदनाम मत करो

अपनी ओछी विचारों वाली फिल्मों से

तांडव वो नृत्य है जिससे सृष्टि का सृजन हुआ

तांडव वो नृत्य है जिससे काम भस्म हुआ

तांडव सत्य का नाद है

तांडव पाप का विनाश है

तांडव है दहकती हुई आग की ज्वाला

तांडव है नीलकंठ में धारित हाला

मन का करुण विलाप तांडव है

संगीत का प्रथम आलाप तांडव है

तांडव केवल शिव नही है शक्ति भी है

तांडव केवल भय नही है भक्ति भी है

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      इस कविता को लिखते वक्त अगर शब्दो में या टाइपिंग में मुझसे कोई गलती हो गई हो तो उसके लिए मै बेहद माफी चाहूंगा | मै जल्दी ही एक नई रचना आपके सम्मुख प्रस्तुत करूंगा | तब तक अपना ख्याल रखें अपनों का ख्याल रखें , नमस्कार |

शनिवार, 23 जनवरी 2021

कविता , नेता हो तो सुभाष जैसा हो

        नमस्कार , भारत की आजादी के प्रथम प्रमुख नायको मे से एक , राष्ट्रप्रेम और देशभक्ति के प्रतिक पुरुष ,  महान नेता एवं क्रांतिकारी नेताजी सुभाष चंद बोस को उनकी जन्मजयंती पर मेरा नतमस्तक नमन वंदन 🇮🇳🇮🇳🙏

        एक देश एवं इस महान देश के नागरीक होने के नाते हम नेताजी का जितना भी गुणगान करें वह कम होगा पर किर भी मैं अपनी छोटी सी एक कविता नेताजी के श्री चरणों में समर्पित करता हूँ


नेता हो तो सुभाष जैसा हो

वर्ना ना हो


कर्तव्यनिष्ठ राष्ट्रप्रेमी देशभक्त

स्वयं के स्वार्थ को परे रख

सत्य के पथ पर होकर अटल

तीव्र वेग से चलने वाले

पुण्य प्रकाश के जैसा हो


नेता हो तो सुभाष जैसा हो

वर्ना ना हो


जिसकी आवाज सुनकर के

देश के दुश्मनों के पैर कांपे

जो वचनबद्ध होकर के कर्तव्य 

निभाने को आठो पहर जागे

जिसका व्यक्तित्व आकाश जैसा हो


नेता हो तो सुभाष जैसा हो

वर्ना ना हो

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शुक्रवार, 15 जनवरी 2021

ग़ज़ल , इंसानों कों पहचानने में कच्ची हैं तेरी आंखें

        नमस्कार , मैने एक नयी ग़ज़ल लिखी है जिसे मै आपके सम्मुख रख रहा हूँ मेरी ये नयी ग़ज़ल आपको कैसी लगी मुझे जरुर बताइएगा |

इंसानों कों पहचानने में कच्ची हैं तेरी आंखें

तीन साल की मासूम बच्ची हैं तेरी आंखें


कोई बनावटी अंदाज नही उतरता इनमें

तुझसे तो सौ गुना अच्छी हैं तेरी आंखें


खुदा की कसम कितनी बडी़ झुठी है तू

कसम से यार कितनी सच्ची हैं तेरी आंखें


तमाम झुठ तमाम सच फिर भी हैं मासूम

तू तो होगई जवान मगर बच्ची हैं तेरी आंखें

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बुधवार, 30 दिसंबर 2020

कविता , आओ 2021 आओ

      नमस्कार , सबसे पहले आपको नए वर्ष 2021 की हार्दीक शुभकामनाएं | 2021 से कई उम्मीदे जताते हुए मैने एक कविता लिखी है जिसे मैं आपसे सम्मुख प्रस्तुत कर रहा हूं कैसी रही मुझे जरुर बताइएगा |


आओ 2021 आओ


आओ 2021 आओ

उम्मीदों की नई रोशनी लाओ

खुशखबरी की वैक्सीन लगाकर

महामारी को मार भगाओ

आओ 2021 आओ


मन के सारे गम मिटाओ

खुशहाली हर घर लाओ

नए सपनों के पंख लगाकर

सब का जीवन स्वर्ग बनाओ

आओ 2021 आओ


फिर इतिहास मत दोहराना

2020 की तरह मत आना

आओ तुम ऐसे के सब कहे

कुछ और बरस रुक जाओ

आओ 2021 आओ

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