शनिवार, 16 सितंबर 2017

कर्म पुजा हो तुम्हारी

      नमस्कार , आप सब को विश्वकर्मा जयंती की हार्दिक शुभकामनाएं | आज का दिन भगवान विश्वकर्मा की पूजा ,अर्चना का दिन है | मान्यताओं के अनुसार आज के दिन सभी प्रकार के लौह उपकरणों , वाहनों एवम मशीनों आदि की पूजा की जाती है | विश्वकर्मा जयंती की सबसे बडी प्रेरणा कर्मठ होना है | जिस तरह इस प्रकृति का हर एक कण - कण हर एक जीव अपने कर्म के अधीन है उसी प्रकार मानव को भी सदैव कर्मठ होना चाहिए |

विश्वकर्मा जयंती

       मेरी एक कविता जिसे मैं विश्वकर्मा जयंती के इस पावन पर्व पर आप सबके साथ साझा करना चाहता हूं | मुझे यकीन है मेरी यह कविता इस पावन अवसर पर आपके मन का भी प्रतिनिधित्व करती नजर आएगी |

                                                             - कर्म पूजा हो तुम्हारी -

सदियों के कर्म फल से
तुमको मानव तन मिला है
एक लक्ष्य हो मनुष्य तेरी
कुछ ना दूजा हो
कर्म पूजा हो तुम्हारी

कर्मठ हैं चांद - तारे
कर्मठ आकाश है
कर्मठ है पर्वत - नदियां
कर्मठ सृजन विनाश है
कर्मठ हो जाओ ऐसे ज्यों पाषाण जल में डूबा हो 
कर्म पूजा हो तुम्हारी

कर्म के आधीन हीं वायु का प्रवाह है
कर्म के आधीन ही पेड़ छायादार है
कर्म के अधीन ही जुगनू चमकते हैं रात भर
कर्म के अधीन हो जाओ ऐसे ज्यों गुल में कांटा हो
कर्म पूजा हो तुम्हारी

     यह कविता आपको कैसी लगी मुझे अपने कमेंट्स के जरिए जरूर बताएं | मेरे विचार को व्यक्त करते वक्त अगर शब्दों में मुझसे कोई त्रुटि हो गई हो तो मै इसके लिए छमा प्रार्थी हूं | मेरी एक नई भावना को व्यक्त करने मैं जल्द ही आपसे बातें करने वापस आऊंगा , तब तक अपना ख्याल रखें , अपनों का ख्याल रखें , बड़ों को सम्मान दें , छोटो से प्यार करें , नमस्कार |

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