सोमवार, 26 अप्रैल 2021

ग़ज़ल , सत्य के बीना कहीं गुजारा नही है

     नमस्कार , कल मैने एक नयी ग़ज़ल लिखी है जिसे आपसे साझा कर रहा हूँ आशा है कि आपको मेरी ये नही ग़ज़ल पसंद आएगी |

सच के बीना कहीं गुजारा नही है 

तुमने ये सच जहन में उतारा नही है 


साजिशन अफ़वाह उड़ाई जा रही है 

तुम्हारा प्रधान इतना नाकारा नही है 


जिसे दोस्त समझ बैठे हो प्रधान मेरे 

वो अमेरिका दोस्त तुम्हारा नही है 


वसुधैव कुटुम्बकंम अब बहुत होगया 

ये पुरी वसुधा परिवार हमारा नही है 


नेकी का हासिल है ये दर्द का समंदर 

जिसमें लहरें तो हैं किनारा नही है 


मदद का हाथ अब मुफ्त मे मत दो 

यहां सब स्वार्थी हैं कोई विचारा नही है 


तमाम रात भर चमकता तो है सच है 

मगर ये जुगनू है यार मेरे सितारा नही है 


सियासत न करो लाशों पर हुक्मरानों 

तनहा तुम्हीं हो कोई और सहारा नही है 

   मेरी ये ग़ज़ल आपको कैसी लगी मुझे अपने विचार कमेन्ट करके जरूर बताइएगा | मै जल्द ही फिर आपके समक्ष वापस आउंगा तब तक साहित्यमठ पढ़ते रहिए अपना और अपनों का बहुत ख्याल रखिए , नमस्कार |


कविता , धन का भजन

      नमस्कार  🙏साप्ताहिक काव्य प्रतियोगिता हिन्दी_काव्य_कोश में विषय - धन पर विधा - कविता में दिनांक - 23/4/2021 को रचना भेजी , रचना तो हार गई तो मैने सोचा के आपके साथ साझा किया जाए |

धन का भजन 


धन का भजन लगे बड़ा निराला 

जैसे हो कोई शहद का प्याला 


धन का सूरज बड़ा ही काला 

न दे पाता जीवन को उजाला 


धन तो केवल साधन है साधना नही 

धन तो केवल प्राप्य है अराधना नही 


धन मोहक तो है मोहन नही 

धन प्रिय तो है मगर प्रीतम नही 


धन धारण हो धारणा नही 

धन भोजन हो भावना नही 


धन सम्पति हो संतति नही 

धन समाधान हो विपत्ति नही 


धन का प्रयोग हो पालन नही 

धन का सम्मान हो शासन नही 


धन विचार हो आचार नही 

धन सक्षम हो लाचार नही 

    मेरी ये कविता आपको कैसी लगी मुझे अपने विचार कमेन्ट करके जरूर बताइएगा | मै जल्द ही फिर आपके समक्ष वापस आउंगा तब तक साहित्यमठ पढ़ते रहिए अपना और अपनों का बहुत ख्याल रखिए , नमस्कार |

मंगलवार, 20 अप्रैल 2021

मुक्तक , नवरात्रि

     नमस्कार 🙏आपको श्री राम नवमी पर्व की हार्दिक शुभकामनाएँ | विषय - नवरात्रि पर विधा - मुक्तक में दिनांक - 17/4/2021 दिन - शनिवार को साहित्य बोध के फेसबुक पटल पर मैने ये मुक्तक लिखा था जिसे पटल के द्वारा सम्मानित किया गया है | आप भी रचना पढ़े व बताएं की कैसी रही | 

रचना - 


अपनी शक्ति सब को फिर दिखाओ मां 

अपने भक्तों को इस संकट से बचाओ मां 

कोरोनारुपी असुर पाप लेकर आया है 

इस असुर का भी सर्वनाश करने आओ मां 

    मेरा ये मुक्तक आपको कैसा लगा मुझे अपने विचार कमेन्ट करके जरूर बताइएगा | मै जल्द ही फिर आपके समक्ष वापस आउंगा तब तक साहित्यमठ पढ़ते रहिए अपना और अपनों का बहुत ख्याल रखिए , नमस्कार |

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