शुक्रवार, 8 जून 2018

फगुआ लोकगीत , भऊजी हो

    नमस्कार ,  होली हमारे देश भारत के कुछ प्रमुख त्योहारों में से एक है |  होली रंगों का सबसे बड़ा पर्व है जिसमें लोग एक दूसरे को गुलाल लगाते हैं एवं शुभकामनाएं देते हैं |  होली के त्यौहार में कहा जाता है कि दुश्मन भी एक दूसरे के गले लगते हैं एवं गुलाल लगाते हैं |  होली का पर्व उमंग उत्साह एवं  आपसी भाईचारे का पर्व है | होली के पर्व में जीजा साली एवं देवर भाभी के तीखे मीठे रिश्ते की नोकझोंक भी देखने को मिलती है |
होली के त्यौहार में एक लोक गीत भी गायी जाती है जिसे फगुनिया या फगुआ कहते हैं |

फगुआ लोकगीत में देवर भाभी , जीजा साली एवं पति पत्नी के रिश्ते की  झलक देखने को मिलती है |  फगुआ लोकगीत भारत के मध्य प्रदेश , उत्तर प्रदेश , बिहार आदि हिंदी भाषी राज्यों में गायी जाती है| | देवर भाभी के नोक झोंक के रिश्ते पर आधारित 23 मई 2018 को मैंने भी एक फगुआ लोक गीत की रचना की है | जिसे मैं आपके मनोरंजन के लिए आपके समक्ष प्रस्तुत कर रहा हूं -

फगुआ लोकगीत , भऊजी हो

अब के फागुन में
भईया नहीं अइहीं हो , भऊजी हो
कैइसे होली के माजा
उठईबु हो , भऊजी हो

केकरेे से होली में रंग डलबईबु
केकरे से गाले अबीर मलबईबु
पुआ कचोरी अब कइसे छनाई
केकरे से रंगे में चोली भीगबईबु हो , भऊजी हो
कैइसे होली के माजा
उठईबु हो , भऊजी हो

छोटका देवरवा से रंग डलवा ल
हमरे से गाले अबीर हमबा ल
छेना के खाल तू लमहर मलाई
अब होली में का तू जईबु हो , भऊजी हो
कैइसे होली के माजा
उठईबु हो , भऊजी हो

अब के फागुन में
भईया नहीं अइहीं हो , भऊजी हो
कैइसे होली के माजा
उठईबु हो , भऊजी हो

      मेरी ये फगुआ लोकगीत आपको कैसी लगी मुझे अपने कमेंट्स के जरिए जरूर बताइएगा | अगर अपने विचार को बयां करते वक्त मुझसे शब्दों में कोई गलती हो गई हो तो उसके लिए मैं तहे दिल से माफी चाहूंगा | मैं जल्द ही वापस आऊंगा एक नए विचार नयी रचनाओं के साथ | तब तक अपना ख्याल रखें, अपनों का ख्याल रखें ,नमस्कार |  

प्रभाती लोकगीत , अब तुम भी जागो नंदलाला

    नमस्कार ,  प्रभाती भी एक लोकगीत है | इसे मां अपने बच्चे को सुबह के समय जगाने के लिए गाती हैं | प्रभाती लोक गीत भी भारत के कई हिस्सों में गायी जाती है जैसे मध्य प्रदेश , उत्तर प्रदेश , बिहार , राजस्थान आदि | प्रभाती में भी लोरी के तरह ही  वात्सल्य रस का समावेश होता है | प्रभाती लोक गीतों में  माता यशोदा द्वारा भगवान श्रीकृष्ण को सुबह के समय जगाने के दृश्य का गीतों में अनुसरण मिलता है |

    22 मई 2018 को ही मैंने एक प्रभाती भी लिखी थी जिसे मैं आपके साथ साझा कर रहा हूं , मेरे प्रयासो को आपके आशीर्वाद की उम्मीद है -

प्रभाती लोकगीत , अब तुम भी जागो नंदलाला

कलियां जागी , फूल जागे
तितलियां जागी , पत्ते जागे
जागे सारे ग्वाला
सारी दुनिया जाग गई
अब तुम भी जागो नंदलाला

कहीं गेंद खेलो
कहीं माखन खाओ
कहीं मटकी फोडो
दिखाओ कोई खेल निराला
सारी दुनिया जाग गई
अब तुम भी जागो नंदलाला

मैं अब ना तुम्हें जगाउंगी
अपना प्रभाती जाऊंगी
अभी मंदिर भी सजाना है
बनानी है फूलों की माला
सारी दुनिया जाग गई
अब तुम भी जागो नंदलाला

      मेरी ये प्रभाती लोकगीत आपको कैसी लगी मुझे अपने कमेंट्स के जरिए जरूर बताइएगा | अगर अपने विचार को बयां करते वक्त मुझसे शब्दों में कोई गलती हो गई हो तो उसके लिए मैं तहे दिल से माफी चाहूंगा | मैं जल्द ही वापस आऊंगा एक नए विचार नयी रचनाओं के साथ | तब तक अपना ख्याल रखें, अपनों का ख्याल रखें ,नमस्कार |  

गुरुवार, 7 जून 2018

लोरी , बेटा मेरे सो जा अब हो गई है रात

    नमस्कार , अब मैं जिस लोकगीत के बारे में बात करने जा रहा हूं  वह एक ऐसा लोकगीत है जो भाषा , क्षेत्र , राज्य आदि सीमाओं के परे है | क्योंकि लोरी एक ऐसा लोक गीत या गीत है जिसे हर मां अपने बच्चे को सुलाने के लिए बड़े प्यार से गाती है |  हां लोरी की रचना अलग अलग भाषाओं में अलग अलग हो सकती है  लेकिन हर लोरी वात्सल्य रस से भरी हुई होती है  जिसे सुनकर बच्चे को चैन की नींद आती है | हम सब ने भी अपने-अपने बचपन में अपनी अपनी मांओ से लोरी जरूर सुनी होगी |  वर्तमान हालात में हमारे बडे शहरों में भले लोरियां गायक सी होती जा रही हो लेकिन गांवो में यह आज भी फल-फूल रही हैं |

     एक मां के उसके बच्चे से प्यार की कोई तुलना नहीं की जा सकती | मां की ममता को प्रदर्शित करती  हुई मेरी एक लोरी जिसकी रचना मैंने 22 मई 2018 को की थी आपके स्नेह के लिए साझा कर रहा हूं -

टीम टीम करने लगे हैं तारे
चमकने लगा है चांद
बेटा मेरे सो जा
अब हो गई है रात

लोरी , बेटा मेरे सो जा अब हो गई है रात

निंदिया रानी आएगी
सपने खूब दिखाएगी
यह रात बीत जाएगी
सुबह मां खिलाएगी
मुन्ने को दूध भात
बेटा मेरे सो जा
अब हो गई है रात

कल का सूरज आएगा
खिलौने ढेरों लाएगा
मेरा मुन्ना खूब खेलेगा
मैया भी खेलेगी मुन्ने के साथ
बेटा मेरे सो जा
अब हो गई है रात

टीम टीम करने लगे हैं तारे
चमकने लगा है चांद
बेटा मेरे सो जा
अब हो गई है रात

      मेरी ये लोरी लोकगीत आपको कैसी लगी मुझे अपने कमेंट्स के जरिए जरूर बताइएगा | अगर अपने विचार को बयां करते वक्त मुझसे शब्दों में कोई गलती हो गई हो तो उसके लिए मैं तहे दिल से माफी चाहूंगा | मैं जल्द ही वापस आऊंगा एक नए विचार नयी रचनाओं के साथ | तब तक अपना ख्याल रखें, अपनों का ख्याल रखें ,नमस्कार |  

सोहर लोकगीत , राम जोगे जनमें ललनवा

     नमस्कार ,  सोहर एक लोकगीत है जो मध्य प्रदेश के बघेलखंड , राजस्थान एवं उत्तर प्रदेश के कुछ जिलों में गाया जाता है |  सोहर लोकगीत नवजात बच्चे के जन्म होने की खुशी में गाया जाता है | जब मां बच्चे को जन्म देती है तो घर की बाकी औरतें बच्चे के जन्म होने की खुशी में सोहर गाती हैं | सोहर एक बहुत ही प्रचलित लोकगीत है जो कि लगभग हर हिंदी भाषी राज्य में गाया जाता है |

       21 मई 2018 को मैंने भी एक सोहर लोकगीत की रचना की है इस लोकगीत को मैं आपके समक्ष प्रस्तुत कर रहा हूं इस मिटती हुई लोकगीत की विधा को  आपके प्यार की जरूरत है | आशा है इस सोहर लोकगीत को आपका प्यार जरूर मिलेगा -

राम जोगे जनमें ललनवा
सजाओ रे पलनावा
आज बड़ा शुभ दिन है

सोहर लोकगीत , राम जोगे जनमें ललनवा

बधाई हो बाबा के
बधाई हो माई के
बधाई हो दादा के
बधाई हो दादी के
आज बड़ा शुभ दिन है

आनंद भयो रे भवनमां
जुग जुग बाढ रे ललनवा
ठुमक चले रे अगनवां
आज बड़ा शुभ दिन है

राम जोगे जनमें ललनवा
सजाओ रे पलनावा
आज बड़ा शुभ दिन है

      मेरी ये सोहर लोकगीत आपको कैसी लगी मुझे अपने कमेंट्स के जरिए जरूर बताइएगा | अगर अपने विचार को बयां करते वक्त मुझसे शब्दों में कोई गलती हो गई हो तो उसके लिए मैं तहे दिल से माफी चाहूंगा | मैं जल्द ही वापस आऊंगा एक नए विचार नयी रचनाओं के साथ | तब तक अपना ख्याल रखें, अपनों का ख्याल रखें ,नमस्कार |  

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